सियासत न्यूज़ डेस्क-कोरोना वाइरस महामारी से फैली अफरा तफरी थमने का नाम नहीं ले रही है,जहाँ देश भर में लगातार मरीज़ देखने को मिल रहे है,जिनकी तादाद 60 से 70 हज़ार प्रतिदिन हा इससे लोगों में इस वाइरस का डर लगातार बना हुआ है,और आज दिल्ली जैसे शहर में जहाँ मरीज़ बहुत कम हो गये थे वहां भी आज मरीज़ अचानक से बढ़ गये हैं,जिसे देखते हुए मुख्यमंत्री केजरीवाल ने भी आज आपात मीटिंग तक बुलाई है |

वहीँ देश के सबसे घनी आबादी वाले राज्य मे दोबारा से लॉक डाउन लगाये जाने की स्थिति नजर आ रही है,और ये सुझाव उत्तर प्रदेश सरकार को इलाहाबाद हाई कोर्ट ने दिया है,हाई कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए कहा है की “सरकारी अमला सड़कों पर लोगों को बेवजह निकलने, बाज़ारों में भीड़ जमा होने और सोशल डिस्टेंसिंग का सख्ती से पालन करने में नाकाम साबित हुआ है.

लॉक डाउन के दौरान लापरवाही दिखाते लोग - तस्वीर साभार - इंडियन एक्सप्रेस
लॉक डाउन के दौरान लापरवाही दिखाते लोग – तस्वीर साभार – इंडियन एक्सप्रेस

यही सबसे बड़ी वजह है कि तमाम शहरों में कोरोना के मरीज़ काफी तेजी से बढ़ते जा रहे हैं. हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने कहा है कि “कम्प्लीट लॉकडाउन और उस पर सख्ती से अमल कराए बिना कोरोना के संक्रमण को काबू में नहीं किया जा सकता” इससे आगे भी कोर्ट ने अनलॉक के दौरान हुई लापरवाही को भी ध्यान में रखते हुए टिप्पणी भी की है |

हाईकोर्ट बेंच ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा है कि ब्रेड बटर खरीदने के लिए घर से बाहर निकलने से ज़्यादा ज़रूरी जीवन बचाना है. लोगों को समझना होगा कि उन्हें इनमें से क्या चुनना है” हाईकोर्ट द्वारा की गयी इस टिप्पणी के बाद उत्तर प्रदेश सरकार क्या फैसला लेती है |

कोर्ट ने संक्रमण के बढ़ते मामलों के लिए सीधे तौर पर सरकारी अमले को ज़िम्मेदार माना है. फैसले में कहा गया है कि सरकार की तरफ से कहा जाता है कि अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए अनलॉक की शुरुआत की गई, लेकिन यह साफ़ नहीं किया गया कि इस अनलॉक में अर्थव्यवस्था के साथ ही लोगों को कोरोना के संक्रमण से बचाने के लिए भी कोई रोडमैप या एक्शन प्लान था या नहीं. अगर था तो उसका सख्ती से पालन क्यों नहीं कराया गया |

हाई कोर्ट ने इस मामले में सख्त रवैया अपनाते हुए यूपी के चीफ सेक्रेट्री से पूछा है कि जिन ज़िम्मेदार लोगों ने इसका सख्ती से पालन नहीं कराया, उनके खिलाफ क्या कार्रवाई की जा रही है. कोर्ट के इस रुख से कई बड़े अफसरों पर गाज गिरने की आशंका हो गई है.