रविन्द्र उज्ज्वल,जानी खुर्द (मेरठ)-इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपने एक आदेश में साफ किया है कि प्रदेश के स्कूल कॉलेजो का व्यवसायिक रूप में इस्तेमाल नही किया जा सकता। ऐसे में जानी के सीएलम इंटर कॉलेज की व्यवसायिक रूप में प्रयोग हो रही सैकड़ो दुकानों के भविष्य में संचालन पर सवाल खड़े हो गए हैं। जानी के आबूलेन कहे जाने वाली यह दुकाने अगर कोर्ट के घेरे में आती हैं तो प्रतिष्ठान मरघट में तब्दील हो जाएंगे !

जानकारों की माने तो करीब 70 वर्ष पूर्व मुख्य अड्डे पर स्थापित जानी खुर्द सीएमएम इंटर कॉलेज में समय – समय पर प्रबंधको ने स्कूल की आय बढ़ाने के लिए ( लोगो का आरोप हैं कि खुद की जेब गर्म करने के लिए ) कॉलेज के बाहर सैकड़ो दुकानों का निर्माण कराकर लाखो रुपये की पगड़ी लेकर यह दुकाने अपने चहेतो को किराए पर उठा दी। भ्रषटाचार की गंगा ऐसी बही कि एक – एक लोगो को कई – कई दुकाने आवंटित कर दी गई।

यही नही लाखो करोड़ो के खेल में इन दुकानों के ऊपर भी दुकाने बनाकर मोटी पगड़ी वसूलकर इन्हें भी किराय पर चढ़ा दिया गया। लोगो ओर कॉलेज में पढ़ने वाले बच्चों और उनके अभिभावकों का कहना है कि इन दुकानों में खराद के काम, सरिया कटाई, बैंड बाजे, डीजे आदि के शोरगुल से उनकी पढ़ाई में व्यवधान पड़ता हैं। ऐसे में हाईकोर्ट के न्यायाधीश अशोक कुमार ने याचिकाकर्ता दीपेंद्र विक्रम सिंह की याचिका पर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव माध्यमिक शिक्षा को सभी जिलाधिकारियो को इस आशय के निर्देश जारी करने के निर्देश जारी किए हैं। वंही इस संबंध में पूछे जाने पर कॉलेज प्रबन्धक ने ऐसी किसी जानकारी से इंकार किया है।