कोरोना वायरस की वजह से इस साल 24 जुलाई से शुरू होने वाले टोक्यो ओलंपिक को अगले साल तक के लिए टाल दिया गया। जापानी प्रधानमंत्री शिंजो आबे और इंटरनेशनल ओलंपिक कमेटी (IOC) के अध्यक्ष थॉमस बाक मंगलवार को इन खेलों को स्थगित करने पर सहमत हो गए।
यह टोक्यो शहर के लिए बड़ा झटका है, जिसकी ओलंपिक खेलों की तैयारियों के लिए अब तक काफी सराहना हुई है। खेलों के लिए स्टेडियम काफी पहले तैयार हो गए थे और बड़ी संख्या में टिकट भी बिक गए थे। आईओसी पर 24 जुलाई से शुरू होने वाले खेलों को स्थगित करने का दबाव लगातार बढ़ रहा था क्योंकि कोविड-19 के कारण पूरी दुनिया में एक अरब 70 करोड़ लोग घरों में बंद हैं।

ओलंपिक को अब बहिष्कार, आतंकी हमले और विरोधों का सामना करना पड़ा है, लेकिन 1948 के बाद इन्हें हर चार साल में आयोजित किया जाता रहा है। यह दुनिया भर में हजारों लोगों की जान लेने वाले कोरोना वायरस से प्रभावित सबसे बड़ी खेल प्रतियोगिता होगी। इस महामारी के कारण दुनिया भर की खेल प्रतियोगिता ठप्प पड़ी हुई हैं।

अधिकतर खिलाड़ियों के लिये ओलंपिक की तैयारियां करना मुश्किल हो गया था क्योंकि इससे उनके बीमारी से सक्रमित होने का खतरा था। विभिन्न प्रतियोगिताएं और क्वालीफायर्स रद्द कर दी गयी थी और अंतरराष्ट्रीय यात्रा सीमित कर दी गई हैं।

आईओसी ने रविवार को खेलों के भविष्य पर फैसला करने के लिए खुद के लिए चार सप्ताह की समयसीमा तय की थी, लेकिन कनाडा और ऑस्ट्रेलिया ने अपनी टीम भेजने से इनका कर दिया और बाद में प्रभावशाली अमेरिकी ओलंपिक समिति और विश्व एथलेटिक्स भी खेलों को स्थगित करने की मांग में शामिल हो गई।

टोक्यो ने खेलों की मेजबानी पर 12 अरब 60 करोड़ डालर खर्च किया है और इसके ताजा बजट को देखते हुए विशेषज्ञों का मानना है कि खेलों को स्थगित करने से छह अरब डॉलर का अतिरिक्त खर्चा होगा। यह प्रायोजकों और प्रमुख प्रसारकों के लिए भी करारा झटका है जो कि विज्ञापन से होने वाले राजस्व के लिए हर चार साल में होने वाले खेल महाकुंभ का इंतजार करते हैं।
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