रविन्द्र उज्ज्वल ( मेरठ)-पूरे विश्व मे फैला करोना वायरस महामारी के रूप में इस कदर फैल चुका है कि इसका नाम सुनकर ही शरीर मे सिरहन दौड़ जाती हैं। लोगो मे संक्रमण फैलाने से बचाने के लिए पीएम ने पूरे देश में 21 दिनों के लिए लॉक डाउन करने की घोषणा करते हुए लोगो से अपने घरों में रहने की अपील की है। यंहा तक कि तीन से पांच लोगों के एक साथ इकठ्ठा होने तक पर पाबंदी लगा दी गई हैं।

नशा मुक्ति केंद्रों में भर्ती हजारो एडिक्टो पर मंडरा रहा है करोना वायरस का खतरा – किस भी प्रकार के नशे से ग्रस्त एडिक्ट को समाज घृणा की नज़रों से देखता है। परिजन मोटी फीस अदा कर इन्हें जिले भर में खुले दर्जनों कथित नशा मुक्ति केंद्र में इस उम्मीद में भर्ती कराते हैं कि सम्बवतः यंहा दवाओं के इलाज से वह पुनः समाज की मुख्य धारा से जुड़ जाएगा। मगर यंहा इलाज के नाम पर भर्ती होकर घर लौटे दर्जनों पीड़ितों ने बताया कि दवाओं के नाम पर उन्हें सर दर्द की टेबलेट भी नही दी जाती। सभी एडिक्टो को खुद ही 50 ग्राम तेल में सड़ी गली सब्जी खुद ही पकाने के लिए दी जाती हैं। जबकि प्रति व्यक्ति 100 ग्राम आटा तराजू पर तोलकर दिन में दो बार दिया जाता है। सेंटर के कर्मचारियों के कपड़े धोने, जूते साफ करने व लैट्रीन साफ कराने का काम डंडे के बल पर कराया जाता हैं। अंदाज़ इसी बात से लगाया जा सकता हैं कि शौच के बाद इन्हें हाथ धोने के लिए साबुन भी नही दिया जाता।

परिजनों से सेंटर कर्मचारियों की मौजूदगी में मुलाकात के दौरान अगर भूल से किसी ने इसका जिक्र परिजनों के आगे कर दिया तो उनके जाते ही खाल में ऐसा भूसा भर दिया जाता हैं कि चमड़ी उधड़ जाती हैं। करीब पचास मीटर के कमरे में 60 से 80 लोगो को जमीन पर सालो पुरानी गन्दी चादरों पर लेटाया जाता हैं। यंहा मरीजो के शरीर तीन मीटर की बात तो छोड़िए तीन इंच की भी जगह करवट लेने को नही मिलती। ऐसे में यक्ष प्रश्न यह हैं कि जब बाहरी दुनिया मे तमाम सावधानियो के बावजूद लोग करोना से बचने के लिए लोगो से दूरी बनाने से लेकर पल -पल सैनिटाइजर से हाथ साफ कर रहे हैं। जबकि यंहा तो शौच के हाथ साफ करने के लिए भी मिट्टी तक नही है। ऐसे में भगवान ने करे यदि ऐसे किसी केंद्र पर कोई एडिक्ट इस वायरस की चपेट में आ गया तो मंजर रूह कंपाने वाला ही होगा।

नशा मुक्ति केंद्र की फोटो.

उफ इतनी दहशत – अधिकारी यदा कदा इन सेंटरों में खानापूर्ति के लिए चेकिंग के लिए पहुंचते भी हैं। लेकिन छत पर लगे कैमरों ओर अधिकारियों पर भरोसा ना होने के चलते इनके मुंह सिले ही रहते हैं। अभी विगत वर्ष 1 अक्टूबर को परतापुर के एक केंद्र में संचालको द्वारा शराब के नशे में मरीजो के साथ मारपीट का मामला खूब उछला, लेकिन आरोप हैं कि अधिकारियों की मुट्ठी गर्म कर मामला रफा दफा कर दिया गया। परिजनों को झांसे में रखकर इलाज के नाम पर हर माह मोटी रकम झटकने वाले यह सेंटर मालिक हर माह लाखो के वारे के न्यारे कर रहे हैं।

– ऐसे झोंकते है परिजनों के आंखों में धूल- यंहा डंडे के जोर पर सभी एडिक्शन के मरीजो को जबरन डांस कराया जाता हैं। जिससे परिवार को लगे लाडला सुधार में है। वह घर से उनके लिए खाने पीने के समान देशी घी भी भेजते है। जो सेंटर मालिक नॉनवेज में इस्तेमाल कर मंहगी मदिरा के साथ चट कर जाते हैं।

– एडिक्टो के परिजनो नोकरी का भी वायदा दिया जाता हैं। बाकायदा गार्ड की वर्दी में फोटो खिंचवाकर उन्हें आठ दस हजार रुपये की नोकरी दिलाने का झूठा आश्वासन भी देते हैं। तब तक यह मरीज के परिजनों से इलाज के नाम पर सत्तर अस्सी हजार की उतारी भी कर लेते हैं।

फोटो सौजन्य- सोशल मीडिया

– सोसाइटी के नाम पर चल रहे हैं नशा मुक्ति केंद्र- अगर कोई अधिकारी चांज करेगा तो पाएगा कि जिले भर में ज्यादातर कथितं नशा मुक्ति केंद्र फर्जी तरीके से संचालित हो रहे हैं। रिहेबिलिटेशन सेंटर के एक भी मानको का यंहा रत्ती भर भी पालन नही होता

कम उम्र के मासूमो से होता हैं कुकर्म – सेंटर में सेंटर संचालक कम उम्र के मासूम बच्चों के साथ रात में कुकर्म भी करते हैं। इस बात का सभी को पता भी रहता हैं, लेकिन विरोध का मतलब यंहा सभी भली भांति जानते हैं।

इस सम्बंध में लखनऊ सीएम ऑफिस पर तैनात ऑपरेटर ने इसे लेकर गहरी चिंता तो जताई, लेकिन इस बारे में डीएम से ही सम्पर्क करने की सलाह दी।

इस बारे में पूछे जाने पर एसडीएम सदर विपिन खंडेलवाल हालत सुनकर ही सहम गए। उन्होंने इस सबंध में तत्काल मीटिंग बुलाकर समस्या के समाधान की बात कही हैं। वही सीएमओ डॉ राजकुमार गुप्ता ने भी अविलंब कार्यवाही अमल में लाए जाने की बात कही है। वही एडीजी के पीआरओ ने साहब के मीटिंग से फ़ारिग होते ही वार्ता कराने का आश्वासन दिया है। जबकि डीएम, आईजी कप्तान साहब के फोन रिसीव नही हो सके।

सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता नितिन लायन ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट की गाइड लाइन हैं कि मरीज की अनुमति के बिना उसे रिहैब सेंटर में भर्ती नही कराया जा सकता।साथ ही देश मे कंही भी बिना लाइसेंस नशा मुकि केंद्र रिहेबिलिटेशन सेंटर नही खुल सकता।

भाजपा जिलाध्यक्ष अनुज राठी का बयान – उन्होंने इसे बेहद ही गंभीर प्रकरण बताते हुए तत्काल जिले के आला अधिकारियों से वार्ता कर जिले में चल रहे ऐसे सभी केंद्रों के खिलाफ कठोर कार्यवाही कराने का आस्वासन दिया है

नशा मुक्ति केंद्र में एड्स फैलने का पूरा इंतज़ाम

दरअसल कुछ पीडितो ने बताया कि सप्ताह में मरीजो की एक बार होने वाली सेविंग दस से पंद्रह मरीजो की एक ही ब्लेड से की जाती हैं। जिससे यंहा कब कोई एड्स की चपेट में आ जाए कुछ कहा नही जा सकता। सन्दीप, इरफान कपिल आदि मरीजो ने दावा की परतापुर के एक केंद्र में गढ़मुक्तेश्वर का एक एड्स व्यक्ति दो माह तक मरीजो के साथ खाता पीता ओर सोता रहा। इसके अलावा खून के संक्रमण से हेपेटाइटिस सी का भी खतरा बना रहता हैं। यंहा कई मेर्रिज तो ऐसे भी जिन्हें दो साल यही सड़े रहने को मजबूर होना पड़ रहा है। जिनसे उनका मानसिक संतुलन नही गड़बड़ा गया हैं और दवाई के नाम पर यंहा केवल डंडा परेड होती है